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न किसी की आँख का नूर हूँ न किसी के दिल का क़रार हूँ
जो किसी के काम न आ सके मैं वो एक मुश्‍त-ए-गुब़ार हूँ

न तो मैं किसी का हबीब हूँ न तो मैं किसी का रक़ीब हूँ
जो बिगड़ गया वो नसीब हूँ जो उजड़ गया वो दयार हूँ

मेरा रंग रूप बिगड़ गया मेरा यार मुझ से बिछड़ गया
जो चमन ख़िज़ाँ से उजड़ गया मैं उसी की फ़स्ल-ए-बहार हूँ

पए फ़ातिहा कोई आए क्यूँ कोई चार फूल चढ़ाए क्यूँ
कोई आ के शम्मा जलाए क्यूँ मैं वो बे-कसी का मज़ार हूँ

मैं नहीं हूँ नग़मा-ए-जाँ-फज़ा मुझे सुन के कोई करेगा क्या
मैं बड़े बिरोग की हूँ सदा मैं बड़े दुखी की पुकार हूँ

– बहादुर शाह ज़फ़र

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2 thoughts on “

  1. *La’ Kant sends Greetings [ Responds’INNER CALL’ ]Dear Aatman….Jay ho.*


    ​जीवनके प्रति बे-रुखीका ​ एहसास कभी कभी ….ऐसे खयालात ….हमारे भीतर भर
    देता …

    ​”
    न किसी के दिल का क़रार हूँ
    ​….”…खुदको न-चीज़….कहेने लगता…​

    [image: –]

    L.M.Thakkar
    [image: https://%5Dabout.me/lakant46

    *​https://paramaanand.wordpress.com/2015/11/10/%E0%AA%B8%E0%AB%8D%E0%AA%B5-%E0%AA%95%E0%AA%A5%E0%AA%A8/
    2016,
    [ **”Sharing enriches”!Just DO IT. *Wishing U ALL the BEST for your
    journey ahead
    **( Cel*l** 09320773606 /Additional WhatsApp-No:-+91 9819083606 / Skype ID-
    **

    2016-02-23 13:35 GMT+05:30 naren :

    > NAREN posted: “न किसी की आँख का नूर हूँ न किसी के दिल का क़रार हूँ जो किसी
    > के काम न आ सके मैं वो एक मुश्‍त-ए-गुब़ार हूँ न तो मैं किसी का हबीब हूँ न तो
    > मैं किसी का रक़ीब हूँ जो बिगड़ गया वो नसीब हूँ जो उजड़ गया वो दयार हूँ मेरा
    > रंग रूप बिगड़ गया मेरा यार मुझ से बिछड़ ग”
    >

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